ते सद्मनि गिरेर्वेगादुन्मुखद्वाः स्थवीक्षिताः । अवतेरुर्जटाभारैर्लिखितानलनिश्चलैः ॥
वे पर्वत के भवनों में तीव्र वेग से उतरे, जिनके जटाजूट अग्नि के समान स्थिर दिखाई देते थे।
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