मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 45
भ्रूभेदिभिः सकम्पोष्टैर्ललिताङ्गुलितर्जनैः । यत्र कोपैः कृताः स्त्रीणामाप्रसादार्थिनः प्रियाः ॥
जहाँ स्त्रियाँ अपनी भौंहों के इशारे, काँपते अधरों और उँगलियों के संकेत से अपने प्रिय को प्रसन्न करने के लिए क्रोध भी करती थीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें