ते प्रभामण्डलैौम द्योतयन्तस्तपोधनाः । सारुन्धतीकाः सपदि प्रादुरासन्पुरः प्रभोः ॥
वे तेजस्वी तपस्वी अपने प्रकाशमंडल से आकाश को प्रकाशित करते हुए अरुन्धती सहित तुरंत प्रभु के सामने प्रकट हुए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।