तस्मिन्संयमिनामाद्ये जाते परिणयोन्मुखे । जहुः परिग्रहव्रीडां प्राजापत्यास्तपस्विनः ॥
जब वह महान तपस्वी विवाह के लिए उद्यत हुए, तब प्रजापति के व्रत का पालन करने वाले तपस्वियों ने संकोच त्याग दिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।