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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 32
आर्याप्यरुन्धती तत्र व्यापारं कर्तुं अर्हति । प्रायेणैवंविधे कार्ये पुरन्ध्रीणां प्रगल्भता ॥
वहाँ आर्या अरुन्धती भी इस कार्य में सहयोग कर सकती हैं, क्योंकि ऐसे कार्यों में स्त्रियों की प्रगल्भता अधिक उपयोगी होती है।
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