मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 27
सोऽहं तृष्णातुरैर्वृष्टिं विद्युत्वानिव चातकैः । अरिविप्रकृतैर्देवैः प्रसूतिं प्रति याचितः ॥
मैं वैसे ही देवताओं द्वारा सृष्टि के लिए प्रार्थित हुआ हूँ जैसे प्यासे चातक वर्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें