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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 23
किं येन सृजसि व्यक्तमुत येन बिभर्षि तत् । अथ विश्वस्य संहर्ता भागः कतम एष ते ॥
क्या आप वही हैं जिससे सृष्टि होती है या जिससे वह धारण होती है, या फिर आप संहारकर्ता हैं—इनमें से आपका कौन-सा रूप है?
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