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कुमारसंभवम् • अध्याय 6 • श्लोक 22
साक्षादृष्टोऽसि न पुनर्विद्मस्त्वां वयमञ्जसा । प्रसीद कथयात्मानं न धियां पथि वर्तसे ॥
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