त्वत्सम्भावितमात्मानं बहु मन्यामहे वयम् । प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूत्तमादरः ॥
आपके द्वारा सम्मानित होकर हम अपने को महान मानते हैं, क्योंकि श्रेष्ठ व्यक्तियों का सम्मान अपने गुणों में विश्वास उत्पन्न करता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।