अथ ते मुनयः सर्वे मानयित्वा जगद्गुरुम् । इदमूचुरनूचानाः प्रीतिकण्टकितत्वचः ॥
तब उन मुनियों ने जगद्गुरु का सम्मान कर हर्ष से रोमांचित होकर यह कहा।
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