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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 78
विभूषणोद्भासि पिनद्धभोगि वा गजाजिनालम्बि दुकूलधारि वा । कपालि वा स्यादथ वेन्दुशेखरे न विश्वमूर्तेरवधार्यते वपुः ॥
वह कभी आभूषणों से युक्त, कभी सर्पधारी, कभी गजचर्म या रेशमी वस्त्र धारण करने वाला, कभी कपालधारी या चंद्रशेखर—उसका स्वरूप निश्चित नहीं किया जा सकता।
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