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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 77
अकिञ्चनः सन्प्रभवः स सम्पदां त्रिलोकनाथः पितृसद्मगोचरः । स भीमरूपः शिव इत्युदीर्यते न सन्ति याथायविदः पिनाकिनः ॥
वह स्वयं कुछ न रखते हुए भी सम्पत्तियों का मूल है, त्रिलोक का स्वामी है, भयानक रूप वाला होते हुए भी शिव कहलाता है; पिनाकधारी को लोग ठीक से नहीं जानते।
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