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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 74
इति द्विजातौ प्रतिकूलवादिनि प्रवेपमानाधरलक्ष्यकोपया । विकुञ्चितभ्रूलतमाहिते तया विलोचने तिर्यगुपान्तलोहिते ॥
इस प्रकार विपरीत बातें सुनकर पार्वती के अधर काँपने लगे, भौंहें सिकुड़ गईं और आँखों के कोने लाल हो गए।
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