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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 70
इयं च तेऽन्या पुरतो विडम्बना यदूढया वारणराजहार्यया । विलोक्य वृद्धोक्षमधिष्ठितं त्वया महाजनः स्मेरमुखो भविष्यति ॥
और यह भी एक उपहास होगा कि जब तुम गजवाहिनी होकर उस वृद्ध बैल पर आरूढ़ शिव के साथ दिखोगी, तब लोग हँसेंगे।
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