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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 69
अयुक्तरूपं किमतः परं वद् त्रिनेत्रवक्षः सुलभं तवापि यत् । स्तनद्वयेऽस्मिन्हरिचन्दनास्पदे पदं चिताभस्मरजः करिष्यति ॥
इससे अधिक अनुचित क्या होगा कि तुम्हारे चंदनयुक्त वक्ष पर त्रिनेत्रधारी का चिताभस्म लगे?
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