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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 68
चतुष्कपुष्पप्रकराविकीर्णयोः परोऽपि को नाम तवानुमन्यते । अलक्तकाङ्कानि पदानि पादयोर्विकीर्णकेशासु परेतभूमिषु ॥
फूलों से सजी तुम्हारी पगचिह्नों को श्मशान में बिखरे केशों के बीच कौन स्वीकार करेगा?
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