द्रुमेषु सख्या कृतजन्मसु स्वयं फलं तपः साक्षिषु दृष्टमेष्वपि न च प्ररोहाभिमुखोऽपि दृश्यते मनोरथोऽस्याः शशिमौलिसंश्रयः ॥
इन वृक्षों में इसके तप का फल दिखाई देता है, फिर भी इसका मनोरथ शिव को प्राप्त करने का अभी अंकुरित भी नहीं हुआ है।
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