तब उसकी सखी ने उस ब्राह्मण से कहा—हे साधु, यदि तुम्हें जानने की इच्छा है तो सुनो, इसने अपने शरीर को तप के द्वारा ऐसे तपाया है जैसे कमल को गर्म जल से सींचा जाए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।