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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 51
इति प्रविश्याभिहिता द्विजन्मना मनोगतं सा न शशाक शंसितुम् । अथो वयस्यां परिपार्श्ववर्तिनीं विवर्तितानञ्जननेत्रमैक्षत ॥
इस प्रकार ब्राह्मण द्वारा पूछे जाने पर भी वह अपने मन की बात न कह सकी और अपनी सखी की ओर काजल से रहित आँखें फेरकर देखने लगी।
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