यौवन में आभूषण त्यागकर तुमने वृद्धावस्था के योग्य वल्कल क्यों धारण किया? बताओ, क्या संध्या के समय चंद्र और तारे प्रकट होने पर भी रात्रि अरुण होने का विचार करती है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।