मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 41
कुले प्रसूतिः प्रथमस्य वेधसस्त्रिलोकसौन्दर्यमिवोदितं वपुः । अमृग्यमैश्वर्यसुखं नवं वयस्तपः फलं स्यात्किमतः परं वद ॥
तुम प्रथम सृष्टिकर्ता के श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुई हो, तुम्हारा शरीर त्रिलोक के सौन्दर्य के समान है, दुर्लभ ऐश्वर्य और नवयौवन तुम्हारे पास है—फिर बताओ, इससे बढ़कर तप का फल क्या होगा?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें