मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 39
प्रयुक्तसत्कारविशेषमात्मना न मां परं सम्मतिपत्तुमर्हसि । यतः सर्ता सन्नतगात्रि सङ्गतं मनीषिभिः साप्तपदीनमुच्यते ॥
हे सुंदरी, अपने विशेष सत्कार से मुझे अत्यधिक मान मत दो, क्योंकि ज्ञानी लोग कहते हैं कि सात कदम साथ चलने से ही मैत्री हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें