विधिप्रयुक्तां परिगृह्य सत्कियां परिश्रमं नाम विनीय च क्षणम् । उमां स पश्यन्नृजुनैव चक्षुषा प्रचक्रमे वक्तुमनुज्झितक्रमः ॥
विधि के अनुसार सत्कार ग्रहण कर और क्षणभर विश्राम करके उसने सीधी दृष्टि से उमा को देखते हुए क्रमपूर्वक बोलना प्रारंभ किया।
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