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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 31
तमातिथेयी बहुमानपूर्वया सपर्यया प्रत्युदियाय पार्वती । भवन्ति साम्येऽपि निविष्टचेतसां वपुर्विशेषेष्वतिगौरवाः क्रियाः ॥
पार्वती ने उस अतिथि का आदरपूर्वक सत्कार कर स्वागत किया, क्योंकि समभाव रखने वालों के लिए भी व्यक्तियों के भेद से व्यवहार में विशेष आदर होता है।
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