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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 24
स्थिताः क्षणं पक्ष्मसु ताडिताधराः पयोधरोत्सेधनिपातचूर्णिताः । वलीषु तस्याः स्खलिताः प्रपेदिरे चिरेण नाभिं प्रथमोबिन्दवः ॥
वर्षा की बूँदें पहले उसके अधरों और पलकें छूकर, स्तनों से टकराकर टूटती हुई धीरे-धीरे उसकी नाभि तक पहुँचीं।
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