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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 22
अयाचितोपस्थितमम्बु केवलं रसात्मकस्योडुपतेश्च रश्मयः । बभूव तस्याः किल पारणाविधिर्न वृक्षवृत्तिव्यतिरिक्तसाधनः ॥
उसके लिए बिना माँगे प्राप्त जल और चंद्रमा की किरणें ही आहार का साधन थीं, वृक्षों के फल आदि के अतिरिक्त उसने कुछ भी ग्रहण नहीं किया।
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