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कुमारसंभवम् • अध्याय 5 • श्लोक 21
तथाभितप्तं सवितुर्गभस्तिभिर्मुखं तदीयं कमलश्रियं दधौ । अपाङ्गयोः केवलमस्य दीर्घयोः शनैः शनैः श्यामिकया कृतं पदम् ॥
सूर्य की किरणों से तप्त होकर भी उसका मुख कमल के समान शोभायुक्त बना रहा, केवल उसकी लंबी आँखों के कोनों में धीरे-धीरे श्यामिमा आ गई।
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