पवित्र अग्नियों के बीच खड़ी, शुद्ध मुस्कान वाली वह सुमध्यमा पार्वती, दृष्टि को चकाचौंध करने वाले तेज को जीतकर बिना पलक झपकाए सूर्य को देखने लगी।
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