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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 7
कृतवानसि विप्रियं न मे प्रतिकूलं न च ते मया कृतम् । किमकारणमेव दर्शनं विलपन्त्यै रतये न दीयते ॥
मैंने तुम्हारे साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया, न ही तुम्हारे विरुद्ध कुछ किया, फिर भी विलाप करती हुई रति को तुम दर्शन क्यों नहीं देते?
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