मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 5
उपमानमभूद्विलासिनां करणं यत्तव कान्तिमत्तया । तदिदं गतमीदृशीं दशां न विदीर्ये कठिनाः खलु स्त्रियः ॥
जो तुम्हारी सुंदरता के कारण स्त्रियों के लिए उपमान और आकर्षण का कारण था, वह आज ऐसी दशा को प्राप्त हो गया; सचमुच स्त्रियाँ कठोर होती हैं कि वे टूटती नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें