तब कामदेव की पत्नी रति दुःख से क्षीण होकर विपत्ति के अंत तक अपने जीवन को संभालती रही, जैसे दिन में क्षीण हुई चंद्रकला संध्या तक धूमिल बनी रहती है।
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