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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 43
इति चाह स धर्मयाचितः स्मरशापावधिदां सरस्वतीम् । अशनेरमृतस्य चोभयोर्वशिनश्चाम्बुधराश्च योनयः ॥
इस प्रकार धर्मपूर्वक प्रार्थना करने पर सरस्वती ने कामदेव के शाप की अवधि का यह विधान बताया, जैसे बिजली और अमृत दोनों के लिए बादल ही कारण होते हैं।
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