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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 40
कुसुमायुधपत्नि दुर्लभस्तव भर्ता न चिराद्भविष्यति । शृणु येन स कर्मणा गतः शलभत्वं ह्रलोचनार्चिषि ॥
हे कामदेव की पत्नी, तुम्हारा पति शीघ्र ही दुर्लभ नहीं रहेगा; सुनो, वह किस कर्म से शिव की ज्वाला में पतंगे के समान जल गया।
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