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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 39
इति देवविमुक्तये स्थितां रतिमाकाशभवा सरस्वती । शफरीं हदशोषविक्लवां प्रथमा वृष्टिरिवान्वकम्पत ॥
इस प्रकार देवताओं के हित के लिए स्थित रति पर आकाशवाणी ने ऐसी करुणा दिखाई जैसे पहली वर्षा सूखती हुई मछली पर होती है।
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