इति चापि विधाय दीयतां सलिलस्याञ्जलिरेक एव नौ । अविभज्य परत्र तं मया सहितः पास्यति ते स बान्धवः ॥
और यह भी करो कि हम दोनों के लिए एक ही जलांजलि दी जाए, जिसे वह मेरे साथ परलोक में ग्रहण करेगा।
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