तदनु ज्वलनं मर्पितं त्वरयेर्दक्षिणवातवीजनैः । विदितं खलु ते यथा स्मरः क्षणमप्युत्सहते न मां विना ॥
फिर दक्षिण वायु से अग्नि को प्रज्वलित करो, क्योंकि तुम जानते हो कि कामदेव मेरे बिना एक क्षण भी नहीं रह सकता।
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