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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 3
अयि जीवितनाथ जीवसीत्यभिधायोत्थितया तया पुरः । ददृशे पुरुषाकृति क्षितौ हरकोपानलभस्म केवलम् ॥
हे जीवननाथ, क्या आप जीवित हैं? ऐसा कहकर उठी हुई रति ने अपने सामने भूमि पर केवल शिव के क्रोधाग्नि से जला हुआ भस्म देखा।
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