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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 27
इति चैनमुवाच दुःखिता सुहृदः पश्य वसन्त किं स्थितम् । यदिदं कणशः प्रकीर्यते पवनैर्भस्म कपोतकर्बुरम् ॥
दुःखी रति ने उससे कहा—हे मित्र वसंत, देखो यह कैसी स्थिति है कि यह भस्म कबूतर के रंग जैसा होकर हवा से कण-कण में बिखर रहा है।
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