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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 14
हरितारुणचारुबन्धनः कलपुंस्कोकिलशब्दसूचितः । वद् सम्प्रति कस्य बाणतां नवचूतप्रसवो गमिष्यति ॥
हरे और लाल रंग के सुंदर बंधनों वाला, कोकिल के स्वर से सूचित नया आम का पुष्प अब किसके बाण का रूप धारण करेगा?
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