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कुमारसंभवम् • अध्याय 4 • श्लोक 12
नयनान्यरुणानि घूर्णयन्वचनानि स्खलयन्पदे पदे । असति त्वयि वारुणीमदः प्रमदानामधुना विडम्बना ॥
अब तुम्हारे बिना स्त्रियों की आँखों की लालिमा, उनकी लड़खड़ाती वाणी और डगमगाते कदम, मदिरा के नशे की केवल विडम्बना बन गए हैं।
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