मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 9
प्रसीद विश्राम्यतु वीर । वज्र शरैर्मदीयैः कतमः सुरारिः । बिभेतु मोघीकृतबाहुवीर्यः स्त्रीभ्योऽपि सोपस्फुरिताधराभ्यः ॥
हे वीर, प्रसन्न हों और विश्राम करें; मेरे बाणों से कौन सा शत्रु भयभीत नहीं होगा? वह अपनी भुजाओं की शक्ति व्यर्थ कर स्त्रियों के कंपनयुक्त अधरों से भी डरने लगेगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें