रुद्र के क्रोध से भयभीत अपनी आँखें बंद किए हुई पुत्री को करुणा से उठाकर पर्वतराज उसे ऐसे ले चले जैसे देवगज अपने दाँतों में कमलिनी को लेकर शीघ्र गति से चलता है।
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