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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 74
तमाशु विघ्नं तपसस्तपस्वी वनस्पतिं वज्र इवावभज्य । स्त्रीसन्निकर्ष परिहर्तुमिच्छन्नन्तर्दधे भूतपतिः सभूतः ॥
तपस्वी शिव ने उस विघ्न को वृक्ष के समान वज्र से तोड़कर, स्त्री के समीप रहने से बचने की इच्छा से अपने गणों सहित अदृश्य हो गए।
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