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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 73
तीव्राभिषङ्गप्रभवेण वृत्तिम्मोहेन संस्तम्भयतेन्द्रियाणाम् । अज्ञातभर्तृव्यसना मुहूर्त कृतोपकारेव रतिर्बभूव ॥
तीव्र आघात से उत्पन्न मोह के कारण इन्द्रियों की गति रुक गई और अपने पति की मृत्यु से अनभिज्ञ रति कुछ क्षणों तक ऐसे रही मानो उसने कोई उपकार किया हो।
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