तीव्र आघात से उत्पन्न मोह के कारण इन्द्रियों की गति रुक गई और अपने पति की मृत्यु से अनभिज्ञ रति कुछ क्षणों तक ऐसे रही मानो उसने कोई उपकार किया हो।
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