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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 71
तपः परामर्शविवृद्धमन्योर्भूभङ्गदुष्प्रेक्ष्यमुखस्य तस्य । स्फुरन्नुदर्चिः सहसा तृतीयादक्ष्णः कृशानुः किल निष्पपात ॥
तप के स्पर्श से बढ़े हुए क्रोध के कारण भौंहें टेढ़ी होकर भयंकर मुख वाले शिव के तीसरे नेत्र से अचानक प्रज्वलित अग्नि प्रकट हुई।
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