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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 65
अथोपनिन्ये गिरिशाय गौरी तपस्विने ताम्ररुचा करेण । विशोषितां भानुमतो मयूखैर्मन्दाकिनी पुष्करबी जमालाम् ॥
तब गौरी ने अपने ताम्रवर्ण हाथों से तपस्वी शिव को मन्दाकिनी के कमल बीजों की माला अर्पित की, जो सूर्य किरणों से सूख गई थी।
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