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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 5
असम्मतः कस्तव मुक्तिमार्ग पुनर्भवल्क्लेशभयात्प्रपन्नः । बद्धश्चिरं तिष्ठतु सुन्दरीणामारेचितञ्चतुरैः कटाक्षैः ॥
आपकी इच्छा के विरुद्ध कौन मुक्ति मार्ग को अपनाता है? जो जन्म-मरण के भय से आपकी शरण आता है, वह सुन्दरियों के चतुर कटाक्षों से बंधा हुआ दीर्घकाल तक रहे।
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