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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 46
भुजङ्गमोन्नद्धजटाकलापं कर्णावसक्तद्विगुणाक्षसूत्रम् । कण्ठप्रभासङ्गविशेषनीलां कृष्णत्वचं ग्रन्थिमतीं दधानम् ॥
उनकी जटाओं में सर्प लिपटे हुए थे, कानों में दुगुने रुद्राक्ष लटके थे और कंठ की आभा से विशेष रूप से नीली काली मृगचर्म धारण किए हुए थे।
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