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कुमारसंभवम् • अध्याय 3 • श्लोक 44
स देवदारुद्रुमवेदिकायां शार्दूलचर्मव्यवधानवत्याम् । आसीनमासन्नशरीरपातख्यम्बकं संयमिनं ददर्श ॥
वहाँ उसने देवदारु वृक्ष की वेदी पर बाघचर्म बिछाए हुए, शरीर त्याग के निकट, संयमी त्र्यम्बक शिव को बैठे हुए देखा।
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