स देवदारुद्रुमवेदिकायां शार्दूलचर्मव्यवधानवत्याम् । आसीनमासन्नशरीरपातख्यम्बकं संयमिनं ददर्श ॥
वहाँ उसने देवदारु वृक्ष की वेदी पर बाघचर्म बिछाए हुए, शरीर त्याग के निकट, संयमी त्र्यम्बक शिव को बैठे हुए देखा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।