लतागृहद्वारगतोऽथ नन्दी वामप्रकोष्ठार्पितहेमवेत्रः । मुखार्पितैकाङ्गुलिसंज्ञयैव मा चापलायेति गणान्व्यनैषीत् ॥
तब लता-गृह के द्वार पर खड़े नंदी ने बाएँ हाथ में स्वर्ण दंड धारण कर, मुख पर रखी एक अंगुली के संकेत से गणों को चंचल न होने का निर्देश दिया।
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